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पटना में गंगा किनारे बनेगा आधुनिक पर्यटन कॉरिडोर, दीघा से कंगनघाट तक बदलेगी तस्वीर

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पटना में दीघा से कंगनघाट तक गंगा तट को आधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। 330 करोड़ की इस योजना में वॉकवे, ओपन जिम, बटरफ्लाई पार्क और बिहार गौरव उद्यान जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

पटना/आलम की खबर: बिहार की राजधानी पटना अब गंगा किनारे एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। दीघा से सभ्यता द्वार होते हुए कंगनघाट तक फैले गंगा तटीय इलाके को आधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। वर्षों से अवैध कब्जों और बेतरतीब निर्माणों से घिरे इस क्षेत्र को अब नया स्वरूप देने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। जिला प्रशासन और वन विभाग मिलकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि योजना पूरी होने के बाद गंगा किनारे का यह इलाका न सिर्फ पटना की खूबसूरती बढ़ाएगा, बल्कि लोगों के लिए आधुनिक सार्वजनिक स्थल और नया पर्यटन आकर्षण भी बनेगा।जानकारी के अनुसार गंगा तट के इस बड़े विकास कॉरिडोर पर करीब 330 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के तहत लगभग सात किलोमीटर लंबे इलाके को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। प्रशासन की योजना है कि गंगा किनारे हरियाली बढ़ाने के साथ लोगों को घूमने, सैर करने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराया जाए।

इस योजना में सबसे बड़ा आकर्षण चौड़े पैदल मार्ग यानी वॉकवे होंगे। गंगा किनारे बनाए जाने वाले इन रास्तों पर लोग सुबह और शाम आराम से टहल सकेंगे। इसके अलावा युवाओं और फिटनेस पसंद लोगों के लिए ओपन जिम की व्यवस्था भी की जाएगी। बच्चों और परिवारों के लिए बॉटनिकल गार्डन और बटरफ्लाई पार्क जैसे विशेष आकर्षण विकसित किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इन सुविधाओं से गंगा तट केवल धार्मिक महत्व का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक शहरी पर्यटन का केंद्र भी बनेगा।

परियोजना के तहत पूरे क्षेत्र को जेपी गंगा पथ से जोड़ा जाएगा, जिससे लोगों की आवाजाही आसान होगी। सभ्यता द्वार से कलेक्ट्रेट घाट तक करीब 450 मीटर लंबा विचरण पथ भी बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे खासकर छठ पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी। हर साल छठ पूजा के समय गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ती है और आवाजाही में दिक्कत होती है। नए कॉरिडोर के बनने से घाटों तक पहुंच अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित हो सकेगी।इसके अलावा गंगा रिसर्च सेंटर और संग्रहालय तक पहुंच भी आसान बनाई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस पूरे इलाके को एकीकृत रूप से विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव मिल सकेगा।

इस योजना का सबसे खास हिस्सा बिहार गौरव उद्यान होगा। बांसघाट के पास करीब 10 एकड़ जमीन पर बनने वाला यह पार्क “वेस्ट टू वंडर” थीम पर आधारित रहेगा। इस थीम के तहत पुराने लोहे और अनुपयोगी वस्तुओं का इस्तेमाल कर बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। पार्क में बिहार की महान विभूतियों और ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक डिजाइन के साथ प्रदर्शित किया जाएगा।

यहां महान गणितज्ञ Aryabhata, नीति विशेषज्ञ Chanakya, सम्राट Ashoka, लोकनायक Jayaprakash Narayan और पर्वत पुरुष Dashrath Manjhi जैसी हस्तियों की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही प्राचीन शिक्षा केंद्र Nalanda University और Vikramshila University के मॉडल भी तैयार किए जाएंगे। इससे आने वाली पीढ़ियों को बिहार की गौरवशाली विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।योजना के तहत दुजरा इलाके में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नए समाधि स्थल को भी विकसित करने की तैयारी की जा रही है। देशरत्न Rajendra Prasad के समाधि स्थल के पास इसके लिए करीब 1.75 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। प्रशासन आसपास मौजूद अवैध कब्जों को हटाने में जुटा हुआ है ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि गंगा तट के विकास से पटना की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। पिछले कुछ वर्षों में जेपी गंगा पथ बनने के बाद राजधानी की तस्वीर तेजी से बदली है और अब इस नए पर्यटन कॉरिडोर से शहर को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना को सही तरीके से लागू किया गया तो यह पटना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। होटल, खानपान, परिवहन और छोटे व्यापार से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

स्थानीय लोगों में भी इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि गंगा किनारे बेहतर सार्वजनिक स्थल बनने से परिवारों और युवाओं को घूमने के लिए नया विकल्प मिलेगा। वहीं पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि हरियाली और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया तो यह इलाका शहर के लिए “ग्रीन ज़ोन” की तरह काम कर सकता है।

फिलहाल प्रशासन अवैध कब्जों को हटाने और सुरक्षा के लिए फेंसिंग का काम तेजी से करा रहा है। आने वाले समय में निर्माण कार्य शुरू होने के साथ पटना के गंगा तट की तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ सकती है।

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